सुमेरपुर (पाली)। सुमेरपुर उपखंड क्षेत्र के साण्डेराव कस्बे के अंबिका मंदिर परिसर में स्थित साध्वी जमना बाई की समाधि स्थल पर आज रविवार को मातृ दिवस (मदर्स डे) के उपलक्ष्य में विशेष रूप से एक धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, इस दौरान उपस्थित धर्मसभा को संबोधित करते हुए संत मनसुख हिरापुरी महाराज ने मां की महिमा का भावपूर्ण वर्णन किया। महाराज हिरापुरी ने कहा कि इस सृष्टि में मां का स्थान परमात्मा से भी ऊंचा है,क्योंकि मां ही बालक की प्रथम गुरु होती है और वही उसे जीवन के संस्कारों से सिंचित करती है।
संस्कारों की जननी है मां
संत मनसुख हीरा पुरी महाराज ने अपने प्रवचन में रेखांकित किया कि बालक के चरित्र निर्माण में मां की भूमिका सर्वोपरि है। उन्होंने कहा, “यदि मां संस्कारी है,तो वह पूरे परिवार और आने वाली पीढ़ियों को संस्कारवान बना सकती है। आज की युवा पीढ़ी को पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव में अपने माता-पिता के प्रति कर्तव्यों को नहीं भूलना चाहिए।”घर में ही है चारों धाम आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तीर्थों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपनी मां को कष्ट देता है, उसके लिए मंदिरों और तीर्थों के दर्शन व्यर्थ हैं। मां के चरणों में ही चारों धाम और समस्त तीर्थों का सुख समाहित है। मां की मुस्कान ईश्वर की सबसे बड़ी कृपा का संकेत है।
मातृ दिवस पर दिया संदेश
उन्होंने आह्वान किया कि मातृ दिवस को केवल एक दिन के दिखावे के रूप में न मनाकर, इसे प्रतिदिन मां की सेवा और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का संकल्प लेना चाहिए। महाराज ने कहा कि मां का कर्ज सात जन्मों की सेवा से भी नहीं उतारा जा सकता, क्योंकि वह अपने सुखों का त्याग कर संतान के भविष्य का मार्ग प्रशस्त करती है।
दूर दराज से पहुंची महिला मण्डलियो ने भजनोंं की अलख जगाई
संत मनसुख हिरापुरी महाराज के आगमन एवं धार्मिक आयोजन की सूचना पर दूर-दूर से महिलाओं का हुजूम उमड़ पड़ा। महिलाओं ने गणपति वंदना एवं गुरु वंदना के साथ भजनों की शुरुआत करते हुए एक से बढ़कर एक प्रेरणा दायक भजनों की प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।







