सुमेरपुर (पाली)। उपखंड क्षेत्र के साण्डेराव नेशनल हाईवे पुलिया से नीचे उतरते ही जालोर, बाड़मेर सहित अन्य स्थानों को जोड़ने वाला सांडेराव-दुजाना बाइपास इन दिनों राहगीरों और वाहन चालकों के लिए खतरे का पर्याय बन गया है। अधूरे निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी ने इस मार्ग को ‘मौत का मोड़’ बना दिया है, जहां आए दिन हादसों की आशंका बनी रहती है। लगातार हो रहे दुर्घटनाओं के चलते क्षेत्रवासियों में प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश व्याप्त है।
बाइपास पर सबसे बड़ी समस्या दिशा-सूचक और चेतावनी संकेतकों की कमी है। वाहन चालकों का कहना है कि मार्ग पर कहीं भी साइनबोर्ड या रिफ्लेक्टर नहीं लगाए गए हैं, जिससे बाहरी और अनजान चालक अचानक आने वाले खतरनाक मोड़ों को भांप नहीं पाते। दिन में जहां यह स्थिति जोखिम भरी है, वहीं रात्रि के समय यह मार्ग पूरी तरह ‘ब्लैक स्पॉट’ में तब्दील हो जाता है।
स्थिति तब और भयावह हो जाती है जब स्ट्रीट लाइट के अभाव में पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है। तेज रफ्तार वाहन बिना किसी पूर्व चेतावनी के मोड़ों पर पहुंचते हैं और हादसों का शिकार हो जाते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, अब तक इस मार्ग पर तीन बड़े हादसे हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या अधिकारी किसी बड़ी जनहानि का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से शिकायतों के बावजूद न तो निर्माण कार्य पूरा किया गया और न ही अस्थायी सुरक्षा उपाय किए गए। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए बाइपास निर्माण कार्य को युद्धस्तर पर पूरा करने की बात कही है। साथ ही खतरनाक मोड़ों पर रिफ्लेक्टर और साइनबोर्ड लगाने तथा रात्रि में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई है। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस गंभीर समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। फिलहाल, हर गुजरते दिन के साथ यह अधूरा बाइपास किसी बड़े हादसे की आशंका को और गहरा करता जा रतंहा है।




