सुमेरपुर (पाली)। उपखंड क्षेत्र के सिंदरू गांव के एक व्यक्ति पर लगाए गए हत्या के झूठे आरोपों का हुआ पर्दाफाश। प्राप्त जानकारी के अनुसार भंवरलाल कुमावत पर उनके कुछ परिजनों और ग्रामीणों द्वारा उनके काका दीपाराम की हत्या करने का गंभीर आरोप लगाया गया था।
भंवरलाल के अनुसार उनके काका दीपाराम की कुछ समय पहले स्वाभाविक मृत्यु हो गई थी। दीपाराम जलेरी ‘माताजी के उपासक’ (भोपाजी) थे, जिस कारण समाज और ग्रामीणों की सहमति से उनका अंतिम संस्कार कुआं पर समाधि देकर किया गया था। लेकिन,देवाराम कुमावत और अन्य कुछ लोगों ने आपसी रंजिश के चलते भंवरलाल पर हत्या का आरोप लगाते हुए उपखंड मजिस्ट्रेट के समक्ष मामला दर्ज करा दिया।
प्रशासनिक कार्रवाई में हुआ खुलासा
मामले की गंभीरता को देखते हुए उपखंड मजिस्ट्रेट ने शव को समाधि से बाहर निकालने के आदेश दिए गए उसके बाद मेडिकल बोर्ड द्वारा शव का पोस्टमार्टम किया गया। मेडिकल रिपोर्ट और एफएसएल (FSL) जांच में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि दीपाराम की मृत्यु किसी हिंसा से नहीं,बल्कि साधारण और स्वाभाविक कारणों से हुई थी।
न्याय की जीत
जांच रिपोर्ट आने के बाद भंवरलाल पर लगाए गए सभी आरोप झूठे साबित हुए हैं। भंवरलाल का कहना है कि उन्हें और उनके परिवार को समाज में बदनाम करने के लिए यह एक सोची-समझी साजिश रची गई थी,लेकिन अंततः सत्य की जीत हुई है।




