‘औषधीय पत्तियां तोड़ीं या छवि तोड़ी गई?’—तीन दिन की डेडलाइन, समझौते की चर्चाएं खारिज
शिवगंज(सिरोही)। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने शिवगंज की सियासत में ऐसा तूफान खड़ा कर दिया है, जिसने भारतीय जनता पार्टी के अंदरूनी समीकरणों को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। मामूली दिखने वाली एक घटना अब राजनीतिक प्रतिष्ठा, छवि और आपसी खींचतान की बड़ी कहानी बन चुकी है। भाजपा शिवगंज नगर मंडल के महामंत्री कुंदनमल राठी ने थानाधिकारी बाबूलाल राणा को ज्ञापन सौंपकर अपने ही दल के पूर्व पार्षद राजेश अहीर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। राठी का आरोप है कि 18 अप्रैल की दोपहर तहसील रोड स्थित अमित टेंट हाउस के बाहर वे सहजन (मोरिंगा) के पेड़ से औषधीय उपयोग के लिए पत्तियां और टहनियां ले रहे थे। इसी दौरान टेंट हाउस संचालक द्वारा उनका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल कर दिया गया। राठी का कहना है कि इस वीडियो को जिस तरीके से प्रसारित किया गया, उससे उनकी सामाजिक और राजनीतिक छवि को ठेस पहुंची है। एक बुजुर्ग होने के नाते इसे उन्होंने व्यक्तिगत अपमान बताया और इसे सुनियोजित तरीके से बदनाम करने की साजिश करार दिया।उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि वीडियो को सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से तत्काल हटाया जाए और भविष्य में इस प्रकार की सामग्री अपलोड करने पर सख्त रोक लगाई जाए।
तीन दिन की चेतावनी, नहीं तो कोर्ट का दरवाजा
मामले को और गंभीर बनाते हुए राठी ने पुलिस को तीन दिन की मोहलत दी है। उन्होंने साफ कहा कि यदि तय समय में जांच कर मुकदमा दर्ज नहीं किया गया, तो वे न्यायालय में इस्तगासा पेश करेंगे। यह बयान सामने आते ही मामला सिर्फ एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कानूनी मोड़ लेता नजर आ रहा है।
समझौता’ महज अफवाह—राठी का साफ इंकार
इधर, सोशल मीडिया और शहर में चल रही समझौते की चर्चाओं को भी राठी ने सिरे से नकार दिया है। उनका कहना है कि जिला अध्यक्ष के निवास पर हुई मुलाकात को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और किसी भी प्रकार का समझौता नहीं हुआ है। उन्होंने इन खबरों को भ्रामक और तथ्यहीन बताया।
राजनीतिक हलचल तेज, पुलिस पर टिकी निगाहें
इस पूरे घटनाक्रम ने शिवगंज की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। पार्टी के अंदर खींचतान और सार्वजनिक मंच पर आरोप-प्रत्यारोप ने माहौल को और गर्मा दिया है। अब सभी की नजरें पुलिस कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या यह मामला सिर्फ एक वायरल वीडियो तक सिमटेगा या फिर राजनीतिक संघर्ष का बड़ा रूप लेगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।






