सुमेरपुर (पाली)। उपखंड क्षेत्र के साण्डेराव कस्बे में अंबिका मंदिर स्थित श्री रामेश्वर महादेव मंदिर की वर्षगांठ पर आयोजित धार्मिक कार्यक्रमो के साथ महादेव के परम भक्त नंदी महाराज की स्थापना की गई। भगवान शिव के वाहन नंदी महाराज की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा वैदिक विधि-विधान से संपन्न हुई। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी यहां दिनभर माहौल भक्तिमय बना रहा। धार्मिक अनुष्ठान संत मनसुख हिरापुरीजी महाराज की पावन निश्रा में कर्मकांडी विद्वान् पंडित कांतिलाल ओझा द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन-अर्चन संपन्न कराया। स्थापना के समय “हर-हर महादेव”, “नंदीश्वर नाथ की जय” और “नंदी महाराज की जय” के उद्घोष के साथ शंख, घड़ियाल और घंटों की गूंज से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिला-पुरुष उपस्थित रहे। ग्रामीणों में इस आयोजन को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। अखिल भारत हिन्दू युवा मोर्चा के पाली जिलाध्यक्ष महावीर मेवाड़ा साण्डेराव ने बताया कि महादेव के मंदिर में नंदी की स्थापना अनिवार्य मानी जाती है, क्योंकि नंदी शिव के परम भक्त, गण और वाहन हैं। वे हमेशा शिवलिंग के ठीक सामने बैठते हैं, जो पूर्ण समर्पण, ध्यान और सेवा का प्रतीक है। नंदी की नजर शिव पर टिकी होती है, जो भक्त को अहंकार त्यागकर शिव की भक्ति करने का संदेश देती है। संत मनसुख हिरापुरीजी महाराज ने कहा कि नंदी की स्थापना सेवा और समर्पण है। नंदी को मेहनत और भक्ति का प्रतीक माना जाता है, जो बताते हैं कि शिव तक पहुंचने के लिए ध्यान और एकाग्रता जरूरी है। हरि महाराज ने कहा कि नंदी के कान में अपनी इच्छा कहने से वह सीधी महादेव तक पहुंचती है। नंदी गर्भगृह के द्वारपाल के रूप में रक्षा करते हैं, जो भक्तों को उनकी पूजा के प्रति ध्यान केंद्रित रखने में मदद करते हैं। संत हिरापुरी महाराज ने बताया कि ऋषि शिलाद की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पुत्र के रूप में वरदान दिया था, और बाद में नंदी को अमरता का आशीर्वाद मिला।







