सुमेरपुर (पाली)। एकल अभियान, राजस्थान संभाग (जोधपुर भाग) के तत्वावधान में 12 जुलाई से 21 जुलाई 2026 तक अंचल पाली द्वारा काम्बेश्वर महादेव मंदिर, कान्हा कोलर की पावन धरा पर आयोजित दस दिवसीय प्रारंभिक नवीन आचार्य अभ्यास वर्ग का भव्य एवं सफलतापूर्वक समापन हुआ। वर्ग में विभिन्न संचों से आए 45 नवीन आचार्य भाई-बहनों ने पूर्ण अनुशासन, समर्पण एवं उत्साह के साथ प्रशिक्षण प्राप्त किया।समापन समारोह का शुभारंभ भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर केंद्रीय प्राथमिक सह प्रशिक्षण प्रमुख बृजमोहन मित्तल मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम में अंचल सचिव शैतान सिंह बिरोलिया ने मुख्य वक्ता के रूप में मार्गदर्शन दिया। विशिष्ट अतिथियों में अंचल गतिविधि प्रभारी श्रीपाल सिंह देवड़ा, संभाग प्राथमिक शिक्षा प्रमुख सुरेश शर्मा, बेड़ा संच अध्यक्ष रतन सिंह राठौड़, अंचल अभियान प्रमुख तरुण गर्ग, अंचल कार्यालय प्रमुख राजेश कुमार एवं संच प्रमुख भरत कुमार उपस्थित रहे।

मुख्य अतिथि बृजमोहन मित्तल ने कहा कि एकल अभियान केवल शिक्षा का कार्य नहीं, बल्कि ग्रामोदय से राष्ट्रोदय का विराट अभियान है। उन्होंने आचार्यों से आह्वान किया कि वे अपने-अपने गाँवों में संस्कारयुक्त शिक्षा, सामाजिक जागरण और राष्ट्रभक्ति का वातावरण निर्मित करें। उन्होंने एकल अभियान की गुणवत्ता, कार्यपद्धति एवं आचार्य की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि एक आचार्य ही समाज परिवर्तन का वास्तविक आधार है। मुख्य वक्ता अंचल सचिव शैतान सिंह बिरोलिया ने अपने उद्बोधन में राष्ट्रीय हित, वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों तथा एकल अभियान की भूमिका पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि एकल अभियान वर्षों से पिछड़े, वनवासी एवं दूरस्थ फली-ढाणियों में शिक्षा, संस्कार और सामाजिक जागरण का कार्य कर रहा है। समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त करने, समरसता स्थापित करने तथा राष्ट्रहित के कार्यों को गाँव-गाँव तक पहुँचाने में एकल अभियान की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने सभी आचार्य भाई-बहनों से आह्वान किया कि वे केवल प्रशिक्षण तक सीमित न रहें, बल्कि धरातल पर उतरकर सेवा, संस्कार और संगठन के कार्यों को गति दें।

अंचल अभियान प्रमुख तरुण गर्ग ने वर्ग का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि दस दिवसीय प्रशिक्षण में प्रतिदिन प्रातः 5:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक अनुशासित दिनचर्या के अनुसार प्रशिक्षण संचालित किया गया। प्रतिदिन 10 सत्र आयोजित हुए तथा प्रत्येक सत्र लगभग एक घंटे का रहा। इस प्रकार पूरे वर्ग में कुल 100 प्रशिक्षण सत्रों का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण के दौरान प्रार्थना, योग, व्यायाम, सूर्य नमस्कार, खेल, गीत, समूह चर्चा, व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता, संगठन पद्धति, एकल विद्यालय संचालन, पंचमुखी शिक्षा, संस्कार शिक्षा, ग्राम समिति गठन, परिवार संपर्क, सामाजिक समरसता, ग्राम विकास, स्वास्थ्य जागरण, पर्यावरण संरक्षण, स्वावलंबन, भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय चिंतन तथा सेवा कार्यों सहित अनेक विषयों पर बौद्धिक एवं शारीरिक प्रशिक्षण दिया गया। व्यवहारिक शिक्षण, बालगीत, प्रेरक कथाएँ, शिक्षण विधियाँ एवं विद्यालय संचालन का भी अभ्यास कराया गया। वर्ग के दौरान सभी प्रशिक्षार्थियों की लिखित परीक्षा आयोजित की गई। परीक्षा में उषा कुमारी (देसूरी) ने प्रथम, बसंती कुमारी (नाना) ने द्वितीय तथा रघुराम (सेवाड़ी) ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजेताओं का सम्मान कर उन्हें उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रेरित किया गया।

वर्ग में केंद्रीय, प्रभाग, संभाग, भाग, अंचल एवं संच स्तर की प्रशिक्षण टोली ने विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान किया। सभी प्रशिक्षकों ने आचार्यों के व्यक्तित्व निर्माण, आत्मविश्वास, संगठन कौशल और समाज सेवा की भावना को विकसित करने पर विशेष बल दिया। बेड़ा संच अध्यक्ष रतन सिंह राठौड़ ने अपने संबोधन में सभी प्रशिक्षार्थियों से निष्ठा, समर्पण एवं सेवा भाव से कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज में समरसता स्थापित करना, भेदभाव मिटाना और प्रत्येक व्यक्ति को साथ लेकर चलना ही एकल अभियान की मूल भावना है। अंचल गतिविधि प्रभारी श्रीपाल सिंह देवड़ा, संभाग प्राथमिक शिक्षा प्रमुख सुरेश शर्मा तथा अंचल कार्यालय प्रमुख राजेश कुमार, आचार्य अभिषेक ने भी प्रशिक्षण की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए प्रशिक्षित आचार्यों को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित विद्यालय संचालन एवं संगठन विस्तार का संकल्प दिलाया।


