सुमेरपुर (पाली)। शहर में अवैध एंबुलेंस संचालन और मनमानी वसूली के आरोपों ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। निजी एंबुलेंस एसोसिएशन सुमेरपुर ने कल शनिवार को उपखंड अधिकारी कार्यालय पहुंचकर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा और अवैध रूप से चल रही एंबुलेंसों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की। यह सब खबर छपने के बाद मामला उजागर हुआ। एसोसिएशन का आरोप है कि बिना पंजीकरण के कुछ एंबुलेंस चालक अस्पतालों के बाहर डेरा डालकर मरीजों और उनके परिजनों से मनमाना किराया वसूल रहे हैं। इससे आमजन आर्थिक शोषण का शिकार हो रहे हैं और अधिकृत चालकों की साख पर भी असर पड़ रहा है। सूत्रों का कहना है कि समाचार प्रकाशित होने के बाद सभी की नींद उड़ गई।
पांच हजार वसूली का मामला बना सुर्खियां
ज्ञापन में हाल ही में सामने आए एक प्रकरण का जिक्र किया गया है, जिसमें एक निजी अस्पताल के बाहर एंबुलेंस चालक द्वारा मरीज के परिजन से ₹5000 वसूलने का आरोप है। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश है। एसोसिएशन का कहना है कि ऐसे चालक मरीजों को दबाव बनाकर अपनी एंबुलेंस में बैठाने का प्रयास करते हैं और निर्धारित दरों से अधिक किराया मांगते हैं।
सांसद का नाम लिखी एंबुलेंस पर सवाल
विवाद उस समय और गहरा गया जब एक एंबुलेंस पर लुंबा राम चौधरी (सिरोही सांसद) का नाम अंकित होने की बात चर्चा में आई। आरोप है कि नाम का उपयोग प्रभाव जमाने के लिए किया जा रहा है। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है,लेकिन मामला राजनीतिक रंग भी लेने लगा है।
अस्पताल परिसरों में ‘अवैध कब्जे’ का आरोप
सुमेरपुर के कई निजी अस्पतालों के बाहर एंबुलेंसों का जमावड़ा लगा रहता है। अधिकृत चालकों का आरोप है कि अवैध संचालक अस्पताल परिसरों के बाहर खड़े होकर व्यवस्था को बाधित कर रहे हैं। एसोसिएशन ने इसे “व्यवस्था के साथ खिलवाड़” बताते हुए कहा कि इससे मरीजों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।
नर्सिंग स्टाफ पर भी गंभीर आरोप
ज्ञापन में कुछ निजी और सरकारी अस्पतालों के नर्सिंग स्टाफ पर भी एंबुलेंस चालकों से अवैध रूप से रुपये मांगने का आरोप लगाया गया है। एसोसिएशन का दावा है कि “राशि नहीं देने पर मरीजों को एंबुलेंस में बैठने से रोका जाता है।
प्रशासन की अग्निपरीक्षा
एसोसिएशन ने प्रशासन से मांग की है कि:क्षेत्र में संचालित सभी एंबुलेंसों की सघन जांच हो,अवैध एंबुलेंसों पर तत्काल रोक लगे,दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो, केवल पंजीकृत एंबुलेंस चालकों को ही सेवा की अनुमति मिले।
अब बड़ा सवाल यह है—क्या प्रशासन सख्ती दिखाएगा या अवैध एंबुलेंस संचालन यूं ही चलता रहेगा? सुमेरपुर में एंबुलेंस व्यवस्था पर उठे सवालों ने स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर बहस छेड़ दी है।







