गांव के लोग अपने घर या मंदिरों में होने वाले विशेष हवन-यज्ञ, पुजा-अर्चना जैसे शुभ कार्य में इसी अती प्राचीन बावड़ी का जल उपयोग में लेते थे
साण्डेराव(पाली)। उपखंड क्षेत्र के साण्डेराव कस्बे में पटवार भवन के सामने अती प्राचीन ऐतिहासिक बावड़ी के चारों तरफ मिट्टी के ढेर लगा देने से हर आमजन परेशान हैं। हजारों सालों से इस प्राचीन ऐतिहासिक बावड़ी के पास ही एक पौराणिक आशापुरा माताजी का मंदिर भी था जिसे भी तोड़ दिया गया और आज करीब दो साल से नया निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। बावड़ी चौंक से गांव के लोग अपने घरों में या फिर मंदिरों में होने वाले विशेष हवन-यज्ञ, पुजा-अर्चना या फिर कोई भी शुभ कार्य में इसी बावड़ी से जल लेकर जाते थे।

गांव में होने वाली मौत के बाद बारहवें की रस्म में गंगा जल भी इसी बावड़ी से गाजों बाजों व ढोल-ढमाकों के साथ कलश यात्रा लेकर जाते थे। वर्तमान में पिछले 2 वर्षो से यहां बावड़ी के चारों ओर उच्चे-उच्चे मिट्टी के ढेर लगा कर छोड़ देने से हर आमजन परेशान हैं। इस संबंध में ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत के प्रशासन दाखुदेवी भील एवं ग्राम विकास अधिकारी जगदीश सुथार से शिकायत कर समस्या के समाधान की मांग की है। जबकि आज करीब दो वर्ष बीत चुके हैं समाधान नहीं होने से ऐतिहासिक प्राचीन बावड़ी का सौन्दर्य बिगड़ता ही जा रहा है। ग्राम पंचायत अधिकारियों का कहना है कि साण्डेराव गांव में स्नातक धर्म कमेटी के नाम एक ट्रस्ट मंडल बना रखा है और गांव के सभी प्राचीन मंदिरों तथा ऐतिहासिक बावड़ी का रंग रोगन, मरम्मत कार्य सहित अन्य कार्य करवाना उनकी जिम्मेदारी है।








